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Hampi - पुरंदर मंडप

पुरंदर मंडप

                           करीब 1540 ई. सवी सन के समय में पुरंदर दास जी विजयनगर साम्राज्य में रहते थे । वे अपने कन्नड भक्ती गीतों से भक्ति प्रचार के काम में लग गए थे । ईसके नाम के मंडप भी तुंगभद्रा के किनारे पर प्रशांत वातावरण में है । बरसात में बाढ़ आने से यह मंडप डूब गए तो मंडप को किसी भी तरह हानि से बचाने के लिए सौकदों खंबों से निर्मित हुआ है मंडप में पुरंदर दास का विग्रह है । यहां प्रशांत वातावरण भी है और देखने लायक श्रेष्ठ प्रकृति सौंदर्य भी है । इस मंडप के पास ही विजय नगर के राजाओं के जमाने में विजयनगर से आनेगुंदी तक निर्माण किया हुआ पुल के अवशेष देख सकते हैं ।

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Hampi - सासिवे कालु गणपती

सासिवे कालु गणपती             इस ब्रहदाकार की मूर्ति का भव्य गर्भगृह है । यह मूर्ति 18 फीट ऊंची है । इसे एक ही शैली में निर्मित किया गया है । गर्भगृह के सामने रंग मंडप है । यह ऊंचा है और कई खंभों से युक्त है ।            इस देवालय के दाहिनी ओर कुछ पिछले भाग में गणपति का मंडप है । इस गणपति को सासिवे कालू गणपति कहते हैं । इस गणपति को गर्भगृह नहीं है और इसे खुले मंडप में प्रतिष्ठित किया गया है । यह मूर्ति करीब 12 फीट ऊंची है और इसे एक शिला से निर्माण किया गया है ।

Hampi - कृष्ण देवालय

कृष्ण देवालय              हेमकुट से कमलापुर के रास्ते के द्वारा निकले तो हंपी का प्रवेश द्वार मिलेगा । अब यह द्वार शिथिल हो गया है । इस प्रवेश द्वार के द्वारा आगे बढ़े तो दाहिनी और एक विशाल मंदिर मिलेगा यही कृष्ण देवालय है । यह मंदिर 320 फीट लंबा तथा 200 फीट तक चौड़ा है ।              यह मंदिर सुभद्र है । देवालय के किले की रक्षा भी, की गई है । देवालय पुर्वाभिमुख है । कृष्ण देवालय, गजपति के साथ लड़ाई करके,  जय पाकर उसकी यादगारी की भेंट के रूप में 1523 ई. में बालकृष्ण के विग्रह को उदयगिरि से मंगवाकर प्रतिष्ठित किया है । लेकिन वह मूर्ति ही नहीं है । उसे मद्रास के वस्तु प्रदर्शन आले में रखा गया है ।              देवालय के रंग मंडप विशाल तथा सुंदर है । खंभों पर कृष्ण के जीवन चरित्र के कई खुदाई को देख सकते हैं । खुदाई अपूर्व है । प्रवेश करने के लिए दक्षिण पूर्व और उत्तर की ओर से सीढ़ियां है । गर्भ मंदिर के चारों ओर कई सुंदर खुदाईयां है ।           ...